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'स्त्री' की सुपर सक्सेज के बाद श्रद्धा के हौसले बढ़े हुए हैं। '' से चर्चा में आई श्रद्धा की जल्द ही '' भी रिलीज होगी। इस खास मुलाकात में वह 'साहो' और 'छिछोरे' के आलावा स्त्री होने के नाते प्राउड मोमेंट, बेटी की जिम्मेदारी, हिट-फ्लॉप्स के गणित, प्रभास और रोमांस-लिंकअप्स की बातें करती हैं। एक अभिनेत्री के रूप में तो आप फिल्म दर फिल्म संवरती चली गई हैं। एक बेटी के तौर पर घर की कितनी जिम्मेदारी शेयर करती हैं?जब से मैं कमाने लगी हूं, अपने स्टाफ की पेमेंट्स मैं खुद करती हूं। घर के खर्चे में जो भी पेमेंट्स किए जाते हैं, उनके बारे में मैंने डैड को कहा है कि हम आधा-आधा शेयर करेंगे। यह बात मैंने उनसे खूब लड़-झगड़ कर मनवाई है। पहले वह इस बात के लिए बिल्कुल भी राजी नहीं थे, फिर मैंने किसी तरह उन्हें मनाया। अब एक जिम्मेदार बेटी की तरह मैं घर का आधा खर्च उठाती करती हूं। जहां तक मेरी मॉम की बात है, तो उनको मुझे चीजें जबरदस्ती गिफ्ट करनी पड़ती हैं। मेरी मॉम दुनिया की सबसे सिंपल लेडी हैं। वह किसी चीज की डिमांड ही नहीं करतीं। अगर आपकी फिल्म 'साहो' की बात करूं, तो इसमें आप ऐक्शन कर रही हैं। क्या आपको शूटिंग के दौरान किसी इंजरी या चोट का सामना करना पड़ा?सच कहूं, तो 2019 की शुरुआत कई सारी चोटों के साथ हुई। 'स्ट्रीट डांसर' और 'साहो' के दौरान मैं कई बार चोटिल हुई। मेरा ऐंकल, गर्दन, कंधा, हिप, शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा था, जो चोटिल न हुआ हो। असल में जब आप एक डांस फिल्म करते हैं और प्रफेशनल डांसर नहीं हैं, तो आपको बहुत तैयारी करनी पड़ती है। यही 'एबीसीडी 2' के दौरान भी हुआ मेरे साथ। मेरा हेमस्ट्रिंग मसल चोटिल हो गया था। मैं एक महीने तक डांस नहीं कर पाई। 'साहो' के दौरान भी मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी। बहुत कष्ट उठाना पड़ा, मगर मैं समझती हूं कि आप तभी इतना कष्ट उठाते हो या मेहनत करते हो, जब आपको अपने काम से प्यार हो। मुझे अपने काम से मोहब्बत है, तो फिर चाहे शूटिंग के दौरान ऐक्शन दृश्य करते हुए मेरी गर्दन में मोच आ जाए या मेरा पैर टूट जाए, मैं हिम्मत नहीं हारती। शूटिंग पर लगातार फिजियोथेरपिस्ट मौजूद रहते थे और इंजरी हो जाने के बाद फिजियो का सेशन भी लगातार चलता रहता था। मगर तमाम दर्द के बाद फिल्मों को जब देखती, तो लगता कि इस जूनून के लिए यह सहा जा सकता है। प्रभास जैसे सुपरस्टार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? प्रभास की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह बहुत सिंपल हैं। जब तक आप उनसे मिले नहीं होते, तब तक आप उन्हें बहुत बड़ा तीसमारखां समझते हैं, मगर जब आप उनसे मिलते हैं, तो आपको पता चलता है कि वह कितने सादा दिल, जमीन से जुड़े और नॉर्मल इंसान हैं। बेहत शर्मीले और प्यारे हैं वह। उनके साथ काम करने का अनुभव कमाल का रहा। वह बेहद केयरिंग हैं। उन्होंने मेरा और मेरी टीम का बहुत खयाल रखा। वह सेट पर हमेशा मुस्कुराते रहते हैं और मस्ती-मजाक भी करते रहते हैं। 'साहो' के एक हफ्ते बाद आपकी दूसरी फिल्म 'छिछोरे' भी रिलीज हो रही है। कैसा लग रहा है? आपको पता है पहले ये दोनों फिल्में एक ही दिन में रिलीज होने वाली थीं, मगर फिर अब एक हफ्ते के गैप से आ रही हैं। पहले मैं खुश थी कि चलो अच्छा है एक दिन में दो फिल्में, फिर लोगों ने डरा दिया कि एक साथ दो फिल्मों का रिलीज होना सही नहीं। गैप जरूरी है। अब आगे-पीछे रिलीज हो रही हैं, तो उम्मीद करती हूं कि लोगों को दोनों फिल्में पसंद आएं। 'साहो' और 'छिछोरे' दोनों ही अलग विषयों वाली फिल्में हैं। 'छिछोरे' में मैं कॉलेज गोइंग लड़की से लेकर अधेड़ उम्र की औरत के किरदार में दिखूंगी। सायना जैसी रोल मॉडल और बायॉपिक में दर्शक आपको ही देख रहे थे, मगर अब आप वह फिल्म नहीं कर रही हैं? बहुत दुखद है कि मैं सायना नहीं कर पा रही हूं। मुझे वह फिल्म छोड़नी पड़ी, क्योंकि मैं बहुत गंभीर रूप से बीमार हो गई थी, जिसके कारण वह फिल्म काफी पुश हो गई। मुझे डेंगू हो गया था। उसके कारण 'छिछोरे' और 'साहो' का शेड्यूल भी पीछे धकेलना पड़ा। उसकी वजह से सायना बहुत पीछे चली गई। फिर मुझे 'स्ट्रीट डांसर' का प्रस्ताव मिला। रेमो सर (रेमो डिसूजा) ने मुझे 'स्ट्रीट डांसर' दी और यह वही निर्देशक हैं, जिन्होंने मुझे 'एबीसीडी 2' दी थी। मैं उनको मना नहीं कर पाई। मुझे चुनना पड़ा। जाहिर है मैं दोनों फिल्मों को डेट्स नहीं दे सकती थी। मैंने रेमो सर को चुना। श्रद्धा आपकी सुपरहिट फिल्म 'स्त्री' ने पिछले साल अगस्त में ही आपको अभिनेत्री के रूप में प्रतिष्ठा दिलाई। एक स्त्री या लड़की होने के नाते आपने गौरवान्वित कब महसूस किया?मुझे एक स्त्री होने के नाते उस वक्त बहुत गर्व महसूस हुआ, जब ट्रिपल तलाक को खारिज किया गया। मुझे उस वक्त बहुत प्राउड फील होता है, जब मैं अपने आस-पास महिलाओं की समानता को लेकर बदलाव देखती हूं। वैसे अभी बहुत कुछ बदलना बाकी है, मगर शुरुआत हो चुकी है। आप अगर हमारी फिल्म इंडस्ट्री को ही देख लें, तो पहले मेकअप आर्टिस्ट सिर्फ मर्द हुआ करते थे। अब आपको मेकअप के पेशे में लडकियां नजर आएंगी। आप अगर मेरी ही टीम को देख लें, तो उसमें आपको ज्यादातर लड़कियां दिखेंगी। मेरे हेयर, मेकअप, मैनेजर, स्टाइलिस्ट सभी ज्यादातर लड़कियां हैं। सेट पर भी आपको लड़कियों की तादाद खूब देखने को मिलती है। यह बहुत ही प्राउड और खुशनुमा अहसास है।


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