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फिल्म इंडस्ट्री के उन विरले लोगों में से हैं, जो नाप-तौलकर बोलने में कतई यकीन नहीं रखते। वह जो सोचते हैं, खुल्लमखुल्ला बोलते हैं। वहीं, जब जिक्र सिनेमा का हो, तो बच्चों जैसे उत्साह से भरकर बात करते हैं। शादी के बाद भी मुझे बच्चा समझते थेपहले रोमांस के राजा और अब किसी भी किरदार में ढल जाने वाला ऐक्टर, अपने करियर की दो पारियों में से ऋषि कपूर अपनी सेकंड इनिंग को ज्यादा संतोषजनक मानते हैं। बकौल ऋषि, ‘पहले मैं क्या कर रहा था। गाने गा रहा था और डांस कर रहा था। मुझे कोई अच्छा रोल देता नहीं था। लोग मुझे सीरियसली लेते नहीं थे कि अरे बच्चा है। शादी करने के बाद भी मुझे बच्चा ही समझते थे और बोलते थे कि ये इंटरवल के बाद बड़ा हो जाएगा। मुझे ये सब अच्छे रोल तो खासकर 10-15 साल से मिलने लगे। पिछले कुछ सालों में मैंने अग्निपथ, कपूर ऐंड संस जैसी कुछ पिक्चरें की, तो अब मुझे अच्छे और मेन रोल मिलते हैं, नहीं तो मुझे वही डांस, वही रोमांस, वही रोमांटिक फिल्में मिलती थीं। मैं शिकायत नहीं कर रहा हूं। मैंने बहुत लंबा अरसा गुजारा। पहले रोमांटिक फिल्में कीं। फिर जब रिटायर हुआ, तो पिक्चर डायरेक्ट की, वह अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि लोग मेरे पीछे पड़ गए कि आप चरित्र अभिनेता बन जाइए। वीरू देवगन ने राजू चाचा और राहुल रवैल ने कुछ खट्टी, कुछ मीठी के लिए बुलाया, तो उस वक्त से मैं काम कर रहा हूं, अब उसको भी 20 साल हो गए। कोशिश करता हूं कि पूर्वजों का झंडा लहराता रहे50 साल बाद ऐक्टिंग क्या मायने रखती है? इस पर वह कहते हैं, ‘मैं बहुत पैशनेट ऐक्टर हूं। मैं बहुत शौक से काम करता हूं। मेरा नाम जोकर 18 दिसंबर 1970 को आई थी, उससे पकड़ो, तो अगले साल दिसंबर में मेरे करियर के 50 साल हो जाएंगे। वहीं, बॉबी से भी पकड़ो, जिसमें मैं हीरो था, तब भी 46 साल हो गए काम करते हुए। मुझे यही काम आता है। मेरे पूर्वजों ने यही किया है। मेरी चौथी पीढ़ी ऐक्टिंग में है। कोशिश यही रहती है कि जो झंडा इतने सालों से लहरा रहा है, उसे अपनी जगह पर अटूट रखें। मैं ऑडियंस को बताना चाहता हूं कि हर रोल में आप मुझे अलग देखेंगे। ‘’ में भी मेरा अलग लुक है।' ‘दृश्यम’ मेरे साथ नहीं बनी, क्योंकि मैं सेलेबल हीरो नहीं हूंफिल्म 'द बॉडी' के लिए हां करने की वजह पूछने पर ऋषि बताते हैं, ‘यह एक अलग तरह का थ्रिलर है, जिसमें आप जानते हैं कि दोषी ये है, लेकिन क्यों है, कैसे है, वह सस्पेंस है। दूसरे, फिल्म के डायरेक्टर जीतू जोजफ मेरे साथ ‘दृश्यम’ बनाना चाहते थे, लेकिन मैं सेलेबल हीरो था नहीं। मैं अब हीरो तो हूं नहीं, करैक्टर ऐक्टर हो गया हूं और मेरे जैसे करैक्टर ऐक्टर के साथ आप पिक्चर नहीं बना सकते, क्योंकि आप उसे बेच नहीं सकते। मैं ऐक्टर हूं, लेकिन स्टार नहीं हूं और हमारे यहां ये सिस्टम चलता नहीं है कि एक उम्र के बाद में ऐक्टर स्टार रहे। वह पश्चिम में चलता है, लेकिन मुझे यकीन है कि इसमें बदलाव आएगा। लोग करैक्टर ऐक्टर की पिक्चर देखने भी थिअटर आएंगे। यह बदलाव आने भी लगा है।' 'दामिनी' के लिए वह तारीफ नहीं मिलीआम तौर पर मेनस्ट्रीम ऐक्टर्स हिरोइन सेंट्रिक फिल्मों में काम करने से बचते हैं, लेकिन ऋषि कपूर ने चांदनी, तवायफ, नगीना जैसी ऐसी कई फिल्में की हैं। इस पर वह कहते हैं, ‘मैंने तो बहुत किए जी। मुझे कभी ऐसा कोई कॉम्प्लेक्स रहा ही नहीं। मैंने कभी नहीं चाहा कि किसी का रोल कम कर दो, किसी का ज्यादा कर दो, मैं अपने रोल से मतलब रखता था, अपना काम करता रहा हूं। हिरोइन सेंट्रिक फिल्मों में मैंने दामिनी भी की है। मैं समझता हूं कि दामिनी मेरा एक बहुत उम्दा काम है, जिसकी लोगों से उस वक्त तारीफ नहीं की। उन्होंने सनी देओल की तारीफ की, लेकिन वह एक तगड़ा रोल था और वह किरदार करना बहुत मुश्किल था। राजकुमार संतोषी आज तक मुझे बोलता है कि आप नहीं होते, तो मेरी पिक्चर का कुछ नहीं होता।' ऐक्टर बनने के लिए बॉडी बनाना जरूरी नहींनए ऐक्टर्स के बारे में पूछने पर ऋषि कपूर का कहना है, ‘वे बहुत बढ़िया, बहुत फोकस्ड हैं। करीब 8-10 साल पहले जो बच्चे नए आते थे, वे सोचते थे कि ऐक्टर बनने के लिए सिर्फ जिम में मसल बनाना जरूरी है। अरे, मसल शकल के बनाओ (चेहरे की ओर इशारा करके), ऐक्टिंग सूरत से होती है, बॉडी से नहीं होती, तो ये मसल बनाने, घोड़ा चलाने वाले और डांस सीखकर आने वाले ऐक्टर्स का जमाना गया। मैं कितने नए ऐक्टर्स देख रहा हूं, जो बड़े आम लगते हैं। आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव ये जितने लड़के हैं, ये थोड़े एक्सरसाइज करके ऐक्टर बने हैं। वे अच्छे ऐक्टर हैं। उनकी पिक्चरें अच्छी चल रही हैं। रणवीर सिंह, रणबीर भी है उसमें। हां, हेल्दी लगो, अच्छे लगो। मैं तो कभी भी बॉडी बिल्डर नहीं था।


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