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बॉलिवुड में दस्तक देने वाले स्टार किड्स की लिस्ट में अब ऐक्ट्रेस पूजा बेदी की बेटी भी शामिल होने जा रही हैं। अलाया ऐक्टर और के साथ फिल्म '' से अपना ऐक्टिंग डेब्यू कर रही हैं। पेश है उनसे यह खास बातचीत: आपके नाना कबीर बेदी और मां पूजा बेदी ऐक्टर रहे हैं, तो क्या फिल्मी फैमिली से होने की वजह से ही आपने भी ऐक्टिंग को करियर चुना?नहीं, मुझे तो ऐक्टर नहीं बनना था, क्योंकि सब यही कहते थे कि मैं ऐक्टर बनूंगी, तो मैंने सोचा कि मैं ऐक्टर नहीं डायरेक्टर बनूंगी। इसलिए, मैं न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी जाकर डायरेक्शन का कोर्स कर रही थी। उसमें ऐक्टर्स को डायरेक्ट करने की एक क्लास थी, जो मुझे बहुत पसंद आई, तब मैंने तय किया कि मैं ऐक्टर बनूंगी। मम्मा को बताया, तो उन्होंने सीरियसली नहीं लिया तो मुझे लगा कि अगर ऐक्टर बनना है, तो चीजें अपने हाथ में लेनी होंगी, तब मैंने ऐक्टिंग कोर्स के लिए दूसरी यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया। मैंने ढाई साल न्यू यॉर्क में ट्रेनिंग की। फिर, मुंबई में दो साल ऐक्टिंग क्लासेज कीं। बहुत सारे डांस क्लासेस किए। मैंने कथक, कंटेपरेरी, हिप हॉप, बॉलिवुड, सब सीखा। उसके अलावा, जिमनास्टिक्स, हिंदी डिक्शन क्लासेस भी किए। यह भी पढ़ें: आपके नाना और मां भी ऐक्टर हैं। उन्होंने आपको कोई खास सीख दी?वे सभी सपोर्टिव थे, लेकिन मैंने उनसे कहा था कि यह मुझे खुद करना है। मुझे सलाह चाहिए होगी, तो मैं पूछ लूंगी। मैं नहीं चाहती थी कि मुझे सौ लोग सौ तरह की बातें बताएं, क्योंकि फिर सबकुछ मिक्स हो जाता और मैं कंफ्यूज हो जाती। इसलिए, मैंने सोचा कि मैं ये खुद करूंगी, खुद गिरूंगी, खुद सीखूंगी। इसलिए, वे साइलेंट सपोर्टर की तरह मेरे पीछे खड़े थे। आपने भले खुद काफी मेहनत की, पर लोग यही कहेंगे कि फिल्म फैमिली से होने के चलते आपको आसानी से सब मिल गया। इन सवालों के लिए कितनी तैयार हैं?यह सही है कि हमें इससे फायदा होता है कि हमारे घरवाले इंडस्ट्री से हैं। नेपोटिजम एक हकीकत है। हमें यह अहसास होना चाहिए कि हमारे स्ट्रगल में भी हम बहुत प्रिविलेज्ड हैं। जब हम अपना दसवां ऑडिशन दे रहे हैं, कोई अपना सौवां ऑडिशन दे रहा है। हम रिजेक्ट हो जाएं, तो घर पर हमारे पास, परिवार, दोस्त बहुत से लोग हमें सपॉर्ट करने के लिए हैं। जबकि, बहुत से लोग हैं, जो छोटे शाहरों से आते हैं, दिन-रात काम करते हैं, पीजी में रहते हैं, उनके दोस्त-अपने यहां नहीं होते, तो उनका स्ट्रगल बहुत ज्यादा है। उनके आगे हमारा स्ट्रगल कुछ नहीं है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मेरा स्ट्रगल किसी दूसरे से कम है, तो मैं ऐक्टर नहीं बनूंगी। मुझे इससे प्यार है, इसलिए मैं ऐक्टिंग करूंगी। यह फिल्म मॉडर्न रिलेशनशिप के बारे में है। फिल्म में जैसा पिता है, उससे रियल में बेटी शायद नफरत करे, आप इसे कैसे देखती हैं?फिल्म में जो मेरा किरदार टिया है, वह बिल्कुल भी जजमेंटल नहीं है। वह सिर्फ अपने पिता से मिलना चाहती है। इस फिल्म में किसी के भी चॉइस पर जजमेंट नहीं है और यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी। मैं असल जिंदगी में भी ऐसी ही हूं, तो मैंने इस किरदार से काफी रिलेट किया। मेरे पैरंट्स का भी तलाक हो चुका है, लेकिन हम सब बहुत खुश हैं। मेरे दोनों पैरंट्स अलग हो चुके हैं, लेकिन बहुत अच्छे दोस्त हैं। मेरे फादर की दूसरी शादी हो चुकी है, मेरी मां की सगाई हो गई है, मेरे डैड का (दूसरी शादी से) दूसरा बच्चा भी है, जो मेरा भाई है। इसके बावजूद, हम एक खुशहाल परिवार हैं। वैसे, हमारे समाज में इन मामलों में जजमेंट और कॉमेंट ही होता है। आपको कभी ऐसा अनुभव नहीं हुआ?ये आपके माहौल पर है। जब मेरे पैरंट्स का तलाक हुआ, तो उन्होंने उस पर खुलकर बात की। अगर मेरे कुछ सवाल थे, तो वे उसका अच्छा जवाब भी दे देते थे। वे ज्यादा खुश थे। इनफैक्ट, मुझे तो याद भी नहीं कि मेरे पैरंट्स शादीशुदा कब थे, क्योंकि मैं 5 साल की थी, जब वे अलग हुए, तो मैंने यही जिंदगी देखी है और मुझे इस जिंदगी से प्यार है। बर्थडे पर दो-दो गिफ्ट्स मिलते हैं, सारे सेलिब्रेशन दो बार होते हैं। मैं जिस माहौल में बड़ी हुई हूं, वहां कभी इस मामले में जजमेंट नहीं था, मतलब मेरे नाना जी की 4 शादी हुई है, तीन बार तलाक हुआ है, पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पहली फिल्म के तौर पर 'जवानी जानेमन' को क्यों परफेक्ट मानती हैं? फिल्म में सैफ अली और तब्बू जैसे कलाकारों से क्या सीखा?ये मेरे लिए कोई लॉन्च जैसा नहीं था। किसी ने मुझसे यह नहीं कहा कि अलाया, हमारे पास एक अच्छी स्क्रिप्ट है या हम आपके लिए यह फिल्म बना रहे हैं, ऐसा नहीं था। मैंने ऑडिशन दिए। इससे पहले भी ऑडिशन दिए थे। किस्मत से मैं इस रोल में बहुत अच्छे से फिट रही। मैं लकी हूं कि मुझे तब्बू मैम और सैफ सर के साथ काम करने का मौका मिला। शुरू में मैं नर्वस थी, लेकिन फिर मैंने नर्वस शब्द को बैन ही कर दिया। एक वक्त के बाद वे मेरे मम्मा-पापा थे, बस। उन दोनों ने मुझे कड़ी मेहनत और जड़ों से जुड़े रहने की सीख दी। आलिया भट्ट के कारण बदला नामअलाया का असल नाम आलिया फर्नीचरवाला है, हाल ही में उन्होंने अपना नाम बदला है, जिसकी वजह पूछने पर वह कहती हैं, 'हमारी इंडस्ट्री में ऑलरेडी लाजवाब आलिया भट्ट हैं, जिनकी मैं बहुत बड़ी फैन हूं, तो इस खामियाजे (एक नाम के) करियर शुरू करने का कोई मतलब नहीं बनता था। इसलिए, जैसे रणबीर (कपूर) और रणवीर (सिंह) है, वैसे ही अब आलिया-अलाया हो गया।'


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