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अगर आप साठ साल के हैं और आपको तीस साल की लड़की की जिंदगी जीनी है, तो आप कर सकते हैं, क्योंकि आप उस उम्र से गुजर चुके हैं, तो आपको कुछ न कुछ अनुभव होता है। लेकिन साठ साल की तो मैं न हुई हूं, न मैं मां बनी हूं, न मेरी शादी हुई है, तो बहुत से ऐसे इमोशंस हैं, जिसे अनुभव मैंने नहीं किया है, तो वह दिखाना ज्यादा चैलेंजिंग हो जाता है।' यह कहना है ऐक्ट्रेस तापसी पन्नू का, जो अपनी फिल्म 'सांड की आंख' में साठ साल से ज्यादा उम्र की शूटर प्रकाशी तोमर का रोल निभा रही हैं। तापसी के मुताबिक, यह रोल उनके लिए बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। वह कहती हैं, 'यह मेरे लिए मेरा अब तक का सबसे मुश्किल किरदार रहा, क्योंकि मुझे एक ऐसी जिंदगी जीनी थी, जो आप हैं नहीं। फिल्म के लिए खूब सारी ट्रेनिंग भी की। शूटिंग सीखी, गांवों में होने वाले घर के सारे काम, खेतीबाड़ी सब सीखी। उसके बाद असल चैलेंज शूटिंग के दौरान शुरू हुआ। रोज ढाई-तीन घंटे मेकअप करना, एक घंटे उतारना, उस मेकअप में 12-12 घंटे घूमना, सेट पर गर्मियों में पसीना आता था, तो दोबारा मेकअप करना पड़ता था।' हीरोइनों को लड़ाया भी जाता है एक ऐसा दौर भी था जब दो बड़ी हिरोइनें एक साथ काम नहीं कर पाती थीं और उनमें कैट फाइट की खबरें अक्सर सामने आती थीं। हालांकि तापसी इसे ठीक नहीं मानती हैं। वह कहती हैं, 'मुझे समझ नहीं आता कि लोग ये क्यों कहते हैं कि दो हीरोइनें खुशी-खुशी साथ काम नहीं कर सकतीं। मेरी तो कई पिक्चरें ऐसी हो गई हैं, 'जुड़वां' में हम दो थीं। 'मिशन मंगल' में पांच थीं। अब फिर दो हैं और मेरी अगली पिक्चर 'थप्पड़' में आठ औरतें साथ हैं। जब हमने अपना रोल पढ़कर फिल्म के लिए हां कहा है, तो सेट पर थोड़ी एक-दूसरे के बाल नोचने लगेंगे। वैसे हीरोइनों को लड़ाने की कोशिश भी काफी होती है। कोई आकर कहेगा कि लोग कह रहे हैं कि भूमि पेडनेकर बेहतर कर रही हैं आपसे, कोई कहेगा उसकी लाइनें ज्यादा अच्छी हैं, लेकिन ये सब मैं इतना सुन चुकी हूं कि ये ट्रिक्स मुझे समझ में आ चुकी हैं। इसलिए अगर मुझे कोई ऐसा बोलता है, तो मैं कहती हूं कि चलो, अच्छा है, उसकी खातिर ही देख लो यार। हमेशा बजट की दुहाई देते हैं फीमेल सेंट्रिक फिल्मों पर अपना नजरिया रखते हुए तापसी कहती हैं, 'ऐसी फीमेल सेंट्रिक फिल्मों के लिए बजट की दिक्कत तो हमेशा रहती है। हमें हर बात में बजट की दुहाई दी जाती थी। इस बेचारी पिक्चर का उतना बजट है, जितना एक हीरो चार्ज करता है। उसमें भी तमाम तरह की कटौती करके जैसे-तैसे हमने बनाया है। मैं उम्मीद करती हूं कि भविष्य में सभी फीमेल सेंट्रिक फिल्मों का बजट भी हीरोवाली फिल्मों के बराबर हो। हालांकि अभी दिल्ली दूर है, क्योंकि फिल्में सालों से इस बारे में होती हैं कि हीरो कौन है? आप सदियों की इस आदत को एक रात में नहीं बदल सकते हैं। हमें भले ही बुरा लगे, हमें लगता ही है, क्योंकि हमें कहा जाता है कि अपनी फीस कम कर दो, क्योंकि फीमेल ड्रिवेन फिल्म है। हमने अपनी फीस कम की भी है, ताकि ऐसी फिल्में बन सकें। हमें स्क्रीन भी उतनी नहीं मिलती हैं, जितनी हीरो वाली फिल्मों को मिलती हैं।' तापसी का रोल निभाने के लिए ऐक्टर नहीं बनी हूं 'सांड की आंख' का पोस्टर आने के बाद यह सवाल भी खड़ा हुआ कि जब साठ साल की महिला का रोल अदा करना था, तो किसी उम्रदराज ऐक्ट्रेस को क्यों फिल्म में नहीं लिया गया। इस पर तापसी कहती हैं, 'वे लोग जो यह सवाल कर रहे हैं कि बूढ़ी औरतों के लिए उम्रदराज ऐक्ट्रसेस क्यों नहीं लीं? उनको मैं जवाब दे चुकी हूं। अब वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? वह शायद इसलिए, क्योंकि ट्रेलर बहुत अच्छा है। तभी तो सब पीछे पड़े हैं इसके, वरना कोई एक ऐक्टर से ये सवाल कैसे कर सकता है कि तुम ऐसा किरदार क्यों निभा रहे हो, जो तुम नहीं हो? तो मैं अपना रोल निभाने आई हूं क्या इंडस्ट्री में? अगर मैं तापसी बनकर ही आऊं, तो मुझे ऐक्टर मत बुलाओ न। ऐक्टर की परिभाषा ही होती है कि उस रोल में ढलना, जो आप नहीं है। रंगोली के लिए मैं बहुत इंपॉर्टेंट हूं तापसी और कंगना रनौत की बहन रंगोली के बीच ट्विटर वॉर की खबरें भी अक्सर मीडिया में आती रहती हैं। इस बारे में तापसी कहती हैं, 'रंगोली की टिप्पणियों पर मैं क्या कहूं? पता नहीं क्यों मैं उनकी जिंदगी में इतनी अहमियत रखती हूं कि मैं जो भी बोलूं, उनकी उस पर कुछ न कुछ टिप्पणी रहती है। इसका मतलब है कि मैं उनकी लाइफ में मैटर करती हूं। वह मेरी लाइफ में अहमियत नहीं रखतीं, इसलिए मैं उन पर टिप्पणी नहीं देती हूं। मैं ऐसी चीज पर अपना समय बर्बाद नहीं करती हूं। शायद मैं उनकी जिंदगी में काफी अहम हूं, इसलिए वह बहुत समय लगाती हैं मेरे ऊपर, मैं क्या कर सकती हूं। मुझे लगता है कि रंगोली मुझसे बहुत प्यार करती हैं।' 'थप्पड़' में तेज-तर्रार नहीं दब्बू बनी हूं तापसी सांड की आंख के बाद अनुभव सिन्हा की फिल्म 'थप्पड़' में नजर आने वाली हैं। वह बताती हैं, 'थप्पड़ में मेरा अमृता का रोल है। वह बहुत घरेलू, दबी हुई, शांत स्वभाव की लड़की है, जो मैं बिलकुल नहीं हूं, न ही मैंने कभी ऐसा किरदार किया है। इसलिए, अनुभव सर और मेरा सबसे बड़ा संघर्ष ही यही रहा कि कैसे लोगों को यह भुलाया जाए कि ये लड़की तो पकड़कर तोड़ देगी। इसके बाद अनुराग कश्यप की फिल्म सुपरनैरल या साइंस फिंक्शन थ्रिलर है। भारत में ऐसी फिल्म नहीं बनी है। दिसंबर में मैं अनुराग की फिल्म शुरू करूंगी। फिर 'रश्मि रॉकेट' करूंगी।'


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